बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने आदिवासियों के लिए क्या किया???

 बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने आदिवासियों के लिए क्या किया???

👉जय भीम, जय जोहार साथियों, दोस्तों एक विचार मुझे याद आया जो मैंने कई फेसबुक ग्रुपों और व्हाटसप ग्रुप में देखा है कि कुछ हमारे आदिवासी वामपंथी मिशनरी टाइप के लोग बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को नहीं मानते क्योंकि उन लोगों की सोच है कि बाबा साहेब ने हम आदिवासियों के लिए किया क्या है? और हमें जो भी संविधान में अधिकार मिले हैं वो संविधान से पहले अंग्रेजों ने दिये थे ऐसा वो लोग बोलते हैं। चलो मानते हैं कि हमारे आदिवासियों को बहुत से अधिकार अंग्रेजों ने आजादी के पहले ही दे दिए थे। लेकिन उन गधों को कौन समझाए की आजादी के पहले आदिवासियों की हालत कैसी थी। यदि बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर न होते या बाबा साहेब आदिवासियों के हित के लिए प्रयास न करते तो अंग्रेजों द्वारा दिए गए अधिकार संविधान में सामिल भी न होते क्योंकि इसके पीछे संघ और कांग्रेस के नेता थे जो चाहते ही नहीं थे की आदिवासियों को कोई संविधानिक अधिकार मिले। यह बात जयपाल सिंह मुंडा भली भांति जानते थे।

[आप लोग जयपाल सिंह मुंडा को जरूर पढ़ें]

कुछ आदिवासी वामपंथी लोग कहते हैं कि बाबा साहेब ने हम आदिवासियों को संविधान में अनुसूचित जन जाति कहा है और हमें जातियों में बांट दिया है, इसलिए हम बाबा साहेब को अपना नेता नहीं मानते हैं, ये भी गजब है🤔🤔 इन वामपंथियों को आदिवासी अच्छा लगता है लेकिन अनुसूचित जनजाति अच्छा नहीं लगता। 

👉चलिए अब कुछ और बात करते हैं-

आदिवासियों के मुक्ति दाता डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर-

भारत में आर्यों के आक्रमण के बाद 5000 साल तक आदिवासी समाज को हिन्दू असभ्यता ने जंगलों में रहने के लिए मजबूर किया। 

डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर ने यह कहा है कि हिन्दू धर्म की आत्मा असमानत है और हिन्दू धर्म के वजह से ही देश के आदिवासी एवं दलित निर्माण हुए है (डॉ.बाबा साहेब आम्बेडकर राईटिंग एण्ड स्पीचेस, खण्ड -3. पू. 1 से 92, प्रकाशक-महाराष्ट्र सरकार). उन्होंने प्रिमिटीव ट्राईब्स, क्रिमिनल ट्राईब्स एवं अनटचेबल्य को हिन्दू सभ्यता ने कुछ नहीं दिया और इसी सभ्यता की वजह से ये लोग निर्माण हुए ऐसा कहा, इसलिए उन्होंने हिन्दू सभ्यता को सभ्यता मानने से नकारा है (डॉ.आम्बेडकर राईटिंग एण्ड स्पीचेस, खण्ड -5, पृ.-136, 138, प्रकाशक-महाराष्ट्र सरकार, खण्ड -1, पृ.-220, खण्ड -15, पृ.-917, 918). 5 हजार साल के ऐसे हिन्दू अधर्म और असभ्यता ने आदिवासी समाज को ' दस्यू ' ‘ मलेच्छ बनाकर रखा। जिसके संदर्भ ग्रंथ है ऐत्तरेय ब्राह्मण, ऋगवेद, विष्णु धर्म शास्त्र, विष्णु रुपा, वशिष्ट धर्म शास्त्र, मनु स्मृति, परासर स्मृति इत्यादि (संदर्भ: हिस्ट्री ऑफ दी धर्म शास्त्रा, ले.पी.बी. काने, खण्ड -2, भाग-1, प्रकाशक-भण्डारकर ओरिएण्टल इंस्टिट्यूट, पूना)

👉नोट: इन ग्रंथो को हमारे मूलनिवासीयों द्वारा नहीं पढ़ना हमारे लिए उल्टा घाटा ही साबित हुआ है अन्यथा इनमें हमें कितना नीच माना और बनाया गया है यह षडयंत्र पता चल जाता। शिक्षा को धार्मिक दायरे में बांधकर धार्मिक आदेश-स्त्री शुद्रो ना धियताम के तहत पढ़ने लिखने से रोका गया। 5 हजार साल के अपमान और उत्पीड़न से, डॉ, बाबा साहेब आम्बेडकर ने भारत का संविधान बनाकर आदिवासियों को मुक्त किया है। डॉ.आम्बेडकर ने 23 ऑक्टो. 1928 में सर्वप्रथम ' सायमन कमीशन के समक्ष यह बात कही कि आदिवासियों को वोट का अधिकार दिया जाना चाहिए। उसी तरह आक्टो 1933 में जे.एच. हट्टन के समक्ष आदिवासियों को संविधान में लाकर विशेष संरक्षण होने चाहिए ऐसा मत व्यक्त किया. (संदर्भ डॉ. बाबासाहाब आम्बेडकर राइटिंग एण्ड स्पीचेस, खण्ड -2, पृ.-471-472, पृ.-736, 742) | बाबा साहेब के इन प्रयासों से ही 1935 के गर्वनमेंट एक्ट ऑफ इण्डिया के तहत

1936 में सर्वप्रथम शेड्यूल्ड ट्राईब की सूची बनी उसी तहर बाबा साहेब ने संविधान के कॉलम 15 (4), 16 (4), 46, के 335, 338, 342 के तहत् शिक्षा और नौकरी में आरक्षण संरक्षण दिया। और 330, 332 के तहत राजनीतिक आरक्षण का संरक्षण दिया।  संविधान की 5 वीं और 6 वीं अनुसूची के तहत आदिवासियों को स्वंय शासन एवं मालिकियत का अधिकार भी प्रदान किया और कॉलम 275 के तहत बजट में आर्थिक प्रावधान का प्रबंध भी किया। 

संक्षिप्त में बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने आदिवासियों को भारतीय संविधान में आदिवासी पहचान और संस्कृति के आधार पर संविधानिक अधिकार एवं संरक्षण सुनिश्चित किया। यह इसके पूर्व भारतीय इतिहास में कभी नहीं हुआ। यह आदिवासी हित में भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी क्रांतिकारी घटना है जो डा. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के प्रयासों से ही हो पाया है न कि गांधी, नेहरू, गोलवलकर के। यह बात हम आदिवासियों को आत्मसात कर याद रखनी चाहिए।


👉आदिवासियों की मुक्ति एवं उत्कर्ष यह "आम्बेडकरवाद" 

से ही सम्भव है। भारत के आदिवासियों को मूल निवासियों (इंडिजिनस पीपुल) की पहचान दिलाकर संयुक्त राष्ट्र के यू.एन.डिक्लेरेशन ऑफ दी राईट ऑफ इंडिजिनियस पीपुल 1994 के तहत संस्कृति और संपत्ति के विशेष अधिकार मिलाना, यह डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर के संविधान एवं विचारों से ही संभव हुआ है, वैसे ही हिन्दुवाद नक्सलवाद और पुंजीवाद जो ब्राह्मणवाद के त्रयहथियार है, इनसे आदिवासीयों को मुक्त करने के लिए भी आम्बेडकरवाद की जरूरत है क्योंकि वर्तमान में आदिवासी समुदाय भ्रमित, नेतृत्वहीन एवं दिशाहीन है। मनुवादी अच्छी तरह से जानते है कि आदिवासियों की मुक्ति आम्बेडकरिजम के विचारधारा से यानि ब्रह्मास्त्र को भीमास्त्र से ध्वंस करके ही हो सकती है इसलिए बाबा साहेब आम्बेडकर के प्रति आदिवासियों के दिलो दिमाग में अछूतपण का जहर घोलने का कुत्सित प्रयास किया गया।


👉आम्बेडकरवाद क्या है?

अपमानित, अमानवीय, अवैज्ञानिक, अन्याय एवं असमान सामाजिक व्यवस्था से दुःखी मानव की इसी जन्म में आंदोलन से मुक्ति कर, समता-स्वतंत्रता-बंधुत्व एवं न्याय के आदर्श समाज में मानव और मान (स्त्री-पुरुष समानता भी) के बीच सही संबंध स्थापित करने वाली नई क्रांतिकारी मानवतावादी विचारधारा को आम्बेडकरवाद कहते है।


👉राष्ट्रीय स्तर पर आम्बेडकरीजम को कामयाब करने के 5 लक्ष्य है।

1) संवैधानिक अधिकार एवं संरक्षण मिलाना ताकि भारत के लोगो के लिए समता-स्वातंत्र-बंधुत्व एवं न्याय के तत्वज्ञान सार्थक हो सके।

2) जातिपाति का बिजनाश कर, जातिविहीन आदर्श समाज व्यवस्था का निर्माण करना, जो समता, स्वतंत्रता, बंधुता एवं न्याय के तत्वो पर आधारित हो, यानी सामाजिक लोकतंत्र की प्रस्थापना करना!

3) जाति और वर्ग पर आधारित अर्थव्यवस्था को नष्ट कर आर्थिक लोकतंत्र की प्रस्थापना करना।

4) मूलनिवासी बहुजन समाज का मानवतावाद के लिए शासनकर्ती जमात बनाना।

5) प्रबुद्ध भारत का निर्माण करना।


👉इन पाँच लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नीचे दिये गये पाँच आंदोलन चलाने होंगे-

1) संवैधानिक अधिकार एवं संरक्षण आंदोलन

2) जाति तोडो समाज बनाओं आंदोलन

3) भारतीय आर्थिक भागीदारी आंदोलन

4) शासनकर्ती जमात बनो आंदोलन

5) स्व धर्म-संस्कृति (मूलनिवासियो का धर्म) आंदोलन।

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संदर्भ- आदिवासी हिंदू नहीं है, लेखक कार्तिक उरांव 

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🙌🙌जय सेवा, जय बड़ादेव, जय गोंडवाना 

✍✍जय गोंडवाना कोयतूर सेवा समिति सैलारपुर

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