ज्ञात रहें
आदिवासी समुदाय में हिन्दू देवी देवताओं के लिए कोई जगह नही है। हिन्दू ईश्वरवादी है, जबकि आदिवासी प्रकृति पूजक है तथा नाग संस्कृति को मानते है , जबलपुर, ( मध्यप्रदेश) उच्च न्यायालय ने भी आदिवासियों को हिन्दू नहीं माना है । फिर भी हिन्दू मिशनरियां उन्हे "वनवासी हिन्दू" बताकर उनका अपमान कर रही है ।
इंजी. कार्तिक उरांव
राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, आरक्षण के प्रणेता शाहूजी महाराज , विश्वरत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर
क्रांतिकारी बिरसा मुंण्डा
इन महापुरुषों को सादर समर्पित जिन्होने मूलनिवासी बहुजन समाज को जागृत करने में अपना सारा जीवन अर्पण किया
बाबासाहब डॉ. अम्बेडकर कहते है कि “जो कौम अपना इतिहास नही जानती, अपने इतिहास से सबक नही सिखती इतिहास उन्हें सबक सिखाता हैं।" यदि आपकी पहचान बदल दी गई तो परिणामतः आपका इतिहास बदल जाएगा। इतिहास बदलने से आपके पास न कोई विरासत होगी न कोई पूंजि होगी। आपको दिर्घकाल तक गुलाम बनाएं रखने के लिए वे आपकी पहचान बदलना चाहते है, आपकी पहचान खत्म करना चाहते है। मूलनिवासी बहुजन समाज की पहचान खत्म कर हमारे पास इतिहास की जो विरासत है उस विरासत से वे हमें अलग करना चाहते है ताकि इतिहास से जो ताकत, जो प्रेरणा आपको मिलती है वह ताकत और प्रेरणा आपको न मिले, आप लोग आगे न बढ़ सके। यह सारा प्रयास इसके पीछे है। एक लम्बा षडयंत्र इसके पीछे है।”


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